
राशन घोटाले के आरोपों पर प्रशासन का बड़ा एक्शन! फिंगरप्रिंट लेकर राशन हड़पने की शिकायत, विक्रेता ने अनियमितता मानी; दुकान निलंबन का प्रस्ताव
जीशान अंसारी की रिपोर्ट

कोटा/बिलासपुर। कोटा जनपद क्षेत्र के नवागांव (सलका) स्थित सहकारी विपणन संस्था के उपकेंद्र की राशन दुकान में करीब 300 क्विंटल खाद्यान्न की कथित गड़बड़ी के आरोपों ने अब गंभीर रूप ले लिया है। जनप्रतिनिधियों और ग्रामीणों की शिकायत के बाद खाद्य विभाग ने मामले को गंभीरता से लेते हुए तत्काल मौके पर जांच शुरू कर दी है। फूड इंस्पेक्टर आशीष दीवान ने राशन दुकान पहुंचकर स्टॉक, वितरण रजिस्टर, हितग्राहियों के रिकॉर्ड और वितरण व्यवस्था की जांच की। प्रारंभिक जांच में राशन वितरण को लेकर गंभीर अनियमितताओं के संकेत सामने आए हैं। विभाग ने साफ किया है कि खाद्यान्न की वास्तविक कमी और कथित गड़बड़ी की मात्रा दस्तावेजों के मिलान के बाद ही स्पष्ट होगी।
700-800 कार्डधारकों के राशन पर सवाल

शिकायत में करीब 700 से 800 राशन कार्डधारकों को अप्रैल, मई, जून और जुलाई माह के राशन वितरण में परेशानी होने की बात सामने आई है। आरोप है कि कई मामलों में रिकॉर्ड में राशन वितरण की प्रक्रिया पूरी दिखाई गई, लेकिन हितग्राहियों को वास्तविक रूप से खाद्यान्न नहीं मिला।अब खाद्य विभाग इन सभी हितग्राहियों के रिकॉर्ड का मौके पर सत्यापन कर रहा है। राशन कार्ड, वितरण प्रविष्टि और ऑनलाइन रिकॉर्ड का मिलान कर यह पता लगाया जाएगा कि आखिर कागजों में बंटा राशन जमीन पर कहां गया।
फिंगरप्रिंट लिया, फिर भी राशन नहीं दिया!

जांच के दौरान करीब 20 से 22 हितग्राहियों के ऐसे मामले सामने आने की बात कही गई है, जिनसे राशन वितरण के नाम पर फिंगरप्रिंट तो लिया गया, लेकिन उन्हें राशन उपलब्ध नहीं कराया गया। सबसे गंभीर बात यह है कि फूड इंस्पेक्टर के अनुसार, जांच के दौरान राशन विक्रेता द्वारा भी इस तरह की अनियमितता स्वीकार किए जाने की बात सामने आई है। हालांकि विभाग ने स्पष्ट किया है कि खाद्यान्न की कुल कमी और वास्तविक गड़बड़ी की मात्रा जांच पूरी होने के बाद ही प्रमाणित होगी।
300 क्विंटल राशन का हिसाब होगा!
करीब 300 क्विंटल राशन की कथित गड़बड़ी की शिकायत के बाद अब जांच का दायरा और बढ़ गया है। विभाग यह खंगालेगा कि पिछले महीनों में दुकान को कितना राशन आवंटित हुआ, कितना खाद्यान्न उठाया गया, रिकॉर्ड में कितना वितरण दर्ज है और वास्तव में कितना राशन हितग्राहियों को मिला।
यानी अब जांच में स्टॉक रजिस्टर से लेकर फिंगरप्रिंट और ऑनलाइन वितरण रिकॉर्ड तक का मिलान किया जाएगा। शिकायतकर्ताओं से मांगे गए दस्तावेज फूड इंस्पेक्टर आशीष दीवान ने शिकायतकर्ताओं से उन सभी हितग्राहियों के राशन कार्ड और संबंधित दस्तावेजों की फोटोकॉपी जमा कराने को कहा है, जिन्हें राशन नहीं मिला।
विभाग ने 2 से 3 दिनों के भीतर सभी प्रभावित हितग्राहियों की जानकारी और दस्तावेज उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं, ताकि रिकॉर्ड से उनका मिलान कर वास्तविक स्थिति सामने लाई जा सके।
गड़बड़ी मिली तो राशन दुकान होगी निलंबित
फूड इंस्पेक्टर आशीष दीवान ने बताया कि जांच में अनियमितता पाए जाने पर संबंधित राशन दुकान को निलंबित करने का प्रस्ताव तैयार किया जाएगा।
यदि जांच में खाद्यान्न की कमी, गबन अथवा वितरण में अनियमितता प्रमाणित होती है तो संबंधित संचालक संस्था से खाद्यान्न की भरपाई कराकर पात्र हितग्राहियों को राशन उपलब्ध कराने की कार्रवाई की जाएगी।ग्रामीणों का सवाल—रिकॉर्ड में राशन बंटा तो जमीन पर क्यों नहीं मिला?मामले के सामने आने के बाद ग्रामीणों में भारी नाराजगी है। ग्रामीणों का आरोप है कि कई हितग्राहियों के रिकॉर्ड में राशन वितरण पूरा दिखाया गया, लेकिन उन्हें वास्तविक रूप से खाद्यान्न नहीं मिला। ग्रामीणों ने मांग की है कि पिछले कई महीनों के स्टॉक रजिस्टर, वितरण रजिस्टर, राशन कार्ड की प्रविष्टियां, फिंगरप्रिंट रिकॉर्ड और ऑनलाइन पोर्टल की जांच कराई जाए।
अब जांच रिपोर्ट पर टिकी नजर
फिलहाल खाद्य विभाग ने प्रारंभिक जांच शुरू कर दी है। 300 क्विंटल की कथित गड़बड़ी का आरोप कितना सही है, कितनी मात्रा में खाद्यान्न कम है और इसके लिए कौन जिम्मेदार है—इन सभी सवालों का जवाब जांच पूरी होने के बाद ही सामने आएगा।
लेकिन फिंगरप्रिंट लेने के बाद राशन नहीं देने के मामले सामने आने और विक्रेता द्वारा कथित तौर पर अनियमितता स्वीकार किए जाने की बात ने पूरे मामले को और गंभीर बना दिया है।
अब सबसे बड़ा सवाल यही है—अगर रिकॉर्ड में राशन बांटा गया था, तो आखिर हितग्राहियों के हिस्से का राशन गया कहां?















